चिलाय माता :- तंवर वंश की कुलदेवी

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चिलाय माता की तंवर वंश कुलदेवी के रूप में पूजा आराधना करता है। इतिहास में तंवरों की कुलदेवी के अनेक नाम मिलते हैं जैसे चिलाय माता, जोग माया (योग माया), योगेश्वरी (जोगेश्वरी), सरूण्ड माता, मनसादेवी आदि। This Article are move on niharika times.Read full Article on - https://www.niharikatimes.com/spirituality-astrology/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-10285710.htm...
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स्वांगियां माता :- भाटी राजवंश की कुलदेवी

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स्वांगियां माता : राजस्थान के जनमानस में आस्था की प्रतीक लोकदेवियों, कुलदेवियों के उद्भवसूत्र पर यदि दृष्टि डाली जाये तो हम पायेंगे कि शक्ति की प्रतीक बहुत सी प्रसिद्ध देवियों का जन्म चारणकुल में हुआ है। चारणकुल में जन्मी प्रसिद्ध देवियों में आवड़, स्वांगियां, करणी माता आदि प्रमुख है। विभिन्न राजवंशों की गौरवगाथाओं के साथ इन देवियों की अनेक चमत्कारिक घटनाएँ इतिहास के पन्नों पर दर्ज है। वीर विनोद के लेखक श्यामलदास ने चारणों...
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इस किले की दीवारों से निकलता था खून, सहमे थे लोग

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विश्व के प्राचीन व विशाल किलों में शुमार रोहतास गढ़ किला अपने स्वर्णिम इतिहास की जगह उपेक्षा की दास्तां बयां करने को विवश है। वह इमारत ध्वस्त हो रही है, जहां के कण-कण में सैकड़ों वर्षों का इतिहास छिपा है। वहां पशु बांधे जा रहे हैं और भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग मौन है। वर्षों तक नक्सलियों ने इस पर कब्जा कर रखा था और अब मुक्त होने के बाद भी इसे सहेजने की दिशा में कोई पहल नहीं हो रही है। मीर कासिम के पराजय के साथ शुरू हुआ पतन:- इसे...
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इस किले में शिवाजी ने एक ताकतवर योद्धा अफजल खान को नाटकीय तरीके से मार दिया था.

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  प्रतापगढ़ किला, महाबलेश्वर   महाराष्ट्र के जिला सतारा में स्थित है प्रतापगढ़ किला, जो प्रतापगढ़ के युद्धस्थल के रूप में भी जाना जाता है। किला पोलादपुर से 15 किमी. और महाबलेश्वर से 23 किमी. की दूरी पर स्थित है। समुद्र तल से 1080 मीटर की ऊंचाई पर यह किला एक पर्वत स्कंध पर बना हुआ है। शिवाजी ने नीरा और कोयना नदियों के तटों और पार दर्रे की रक्षा के लिए इस किले के निर्माण का उत्तरदायित्व मोरोपंत त्रिम्बक पिंगल...
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भारत के 10 प्रसिद्ध फोर्ट : Top 10 Famous Forts of India

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1. कुम्भलगढ़ का किला,  राजस्थान (Kumbhalgarh Fort, Rajasthan) :राजस्थान के राजसमन्द में स्तिथ कुम्भलगढ़ फोर्ट का निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया था। इस फोर्ट की दो ख़ास विशेषताए है।  पहली इस फोर्ट की दीवार विशव की दूसरी सबसे बड़ी दीवार है जो की 36 किलो मीटर लम्बी है तथा 15 फ़ीट चौड़ी है, इतनी चौड़ी की इस पर एक साथ पांच घोड़े दौड़ सकते है। दूसरी इस दुर्ग के अंदर 360 से ज्यादा मंदिर हैं जिनमे से 300 प्राचीन जैन...
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इतिहास कि अनोखी प्रेम कहानी और क्षत्रियों में रक्त की शुद्धता बनाए रखने के संकल्प का उत्तम उद्धारण

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ये चित्र ग्वालियर के गूजरी महल का है जो इतिहास कि शानदार इमारतो में से एक हैं । राजपूत राजा राजा मान सिहं तोमर और गुज्जर जाति कि एक आम लडकी ' मृगनयनी ' की । उन दिनों अक्सर मुगलों के आक्रमण होते रहते थे। सिकन्दर लोदी और गयासुद्दीन खिलजी ने कई बार ग्वालियर के किले पर धावा किया, पर वे सफल न हो सके। तब उन्होने आसपास के गांवो को नष्ट कर उनकी फसलें लूटना शुरू कर दिया। उन्होने कई मन्दिरों को तोड-फोड डाला और लोगों को इतना तंग...
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राजस्थान का किला जहां से चांदी के गोले बरसाए गए

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        चूरू का किला इस किला का निर्माण ठाकुर कुशाल सिंह ने 1739 में करवाया था।1857 के विद्रोह में ठाकुर शिव सिंह ने अंग्रेजों का विरोध किया इस पर अंगेजों ने बिकानेर कि सेना लेकर चुरू दुर्ग को चारों और से घेर कर तोपों से गोला बारी की बरसात की जबाव में दुर्ग से गोले बरसाए गये लेकिन जब दुर्ग में तोप के गोले समाप्त होने गले तो लुहारों ने नये गोले बनाये लेकिन कुछ समय पश्चात गोला बनाने के लिए सीसा समाप्त...
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